उत्तरकाशी: औषधीय आमील को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच, तीन कंपनियों से शासन का करार

उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी में पाए जाने वाले औषधीय गुणों से भरपूर आमील (सीबेकथॉर्न) को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में शासन ने अहम कदम उठाया है। आमील के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और ब्रांडिंग को प्रोत्साहित करने के लिए शासन ने तीन निजी कंपनियों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल से वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल सीमावर्ती गांवों के ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मंगलवार को शासन स्तर पर हुए इस समझौते के तहत हिमशक्ति, ग्रो इंडिया और माई पहाड़ी दुकान नामक कंपनियां हर्षिल घाटी क्षेत्र में आमील के उत्पादन से लेकर उसके प्रोसेसिंग और विपणन तक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगी। इन कंपनियों की मदद से आमील से तैयार जूस, चटनी, जैम सहित अन्य उत्पादों को ‘हिलांश’ ब्रांड के नाम से बाजार में उतारा जाएगा।

उत्तराखंड में आमील का उत्पादन सबसे अधिक हर्षिल घाटी और गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में होता है। स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से इसका उपयोग जूस और चटनी के रूप में करते आ रहे हैं। औषधीय दृष्टि से आमील अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, हृदय और त्वचा संबंधी रोगों के साथ-साथ गैस और पाचन तंत्र की समस्याओं में भी उपयोगी है। आमील में ओमेगा-3, 6, 7 और 9 फैटी एसिड के साथ ही विटामिन सी, ई और आवश्यक अमीनो एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

वर्ष 2024 में आमील के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से झाला गांव के आसपास के 50 से अधिक किसानों को इससे जोड़ा गया था। इसके साथ ही इसे वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है।

ग्रामोत्थान परियोजना के प्रबंधक कपिल उपाध्याय ने बताया कि शासन द्वारा किया गया यह करार आमील के संगठित उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करेगा। इससे स्थानीय किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। शासन का मानना है कि इस पहल से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।