उत्तराखंड: किश्तवाड़ मुठभेड़ में कपकोट के जवान गजेंद्र सिंह गढ़िया शहीद, आज होगा अंतिम संस्कार

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ऑपरेशन त्राशी के दौरान उत्तराखंड के कपकोट क्षेत्र के बीथी गांव निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया वीरगति को प्राप्त हो गए। वह भारतीय सेना की 2-पैरा कमांडो यूनिट में तैनात थे। उनके बलिदान की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग देश की सेवा में उनके योगदान पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, रविवार को किश्तवाड़ के छात्रू क्षेत्र के सुदूर-सिंहपोरा इलाके में सुरक्षा बल आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस हमले में हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।

पार्थिव शरीर आज पहुंचेगा कपकोट

परिजनों ने बताया कि शहीद जवान का पार्थिव शरीर मंगलवार को हेलीकॉप्टर के माध्यम से केदारेश्वर मैदान लाया जाएगा। इसके बाद सरयू और खीरगंगा नदी के संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम विदाई में स्थानीय लोग, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

परिवार में शोक का माहौल

शहीद गजेंद्र सिंह अपने पीछे पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंद्रा देवी, पत्नी लीला गढ़िया और दो पुत्र राहुल व धीरज छोड़ गए हैं। उनका छोटा भाई किशोर गढ़िया है। उनके दोनों बच्चे देहरादून में पढ़ाई कर रहे हैं।

पत्नी ने हेलीकॉप्टर से लौटकर लिया अंतिम संस्कार में हिस्सा

बलिदान की खबर मिलते ही पत्नी लीला गढ़िया की तबीयत बिगड़ गई थी। परिचितों की मदद से उन्हें गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड तक लाया गया, जहां से वह हेलीकॉप्टर द्वारा कपकोट पहुंचीं। शहीद के घर में शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है।

सेना में 2004 से सेवा में थीं तैनाती

गजेंद्र सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के विद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने कक्षा छह से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज, कपकोट से की। स्नातक प्रथम वर्ष के दौरान वर्ष 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए और तब से निरंतर देश सेवा में लगे रहे।

शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया का बलिदान पूरे उत्तराखंड और देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी वीरता और समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा।