पलायन का दंस : गांव में बच गए तीन बुजुर्ग महिलाऐ, युवा व पुरुष विहीन हुआ गांव

सतपुली |

इन्द्रजीत असवाल और सरत सिंह

  • ग्राम सभा से 25 किलोमीटर दूर है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
  • तीन किलोमीटर दूर है सड़क चढ़ाई चढ़कर पहुँचना पड़ता है सड़क तक |
  • 2012 में सड़क का सर्वे किया गया था जो आज तक केवल सर्वे ही है, स्थानीय विधायक सतपाल महाराज को भी दिया है कई बार पत्र |

बात यदि पलायन की हो तो पौड़ी गढ़वाल का नम्बर सबसे पहले आता है, जबकि इसी पौड़ी के कई दिग्गज केंद्र सरकार व राज्य सरकार व बड़ी बड़ी पोस्टों पर विराजमान है |

आखिर इस पौड़ी को क्या मिला आज पलायन का दंस झेल रहे हैं | पौड़ी के कई गांओं में 1 व 2 परिवार बच गए हैं तो कई गांव युवा विहीन व पुरुष विहीन हो गए हैं |

आज हम आपको विकास खंड एकेश्वर के ग्राम सालकोट के गडोली तल्ली गांव की कहानी सुना रहे हैं | यहाँ पर अब केवल तीन बुजुर्ग महिला ही रहते हैं | कभी कभार इनके बच्चे गांव आते हैं तभी रौनक बनती है अन्यथा बात करने को कभी कोई नही मिलता |

ग्रामीण बुजुर्गों का कहना है कि यहाँ पर जंगली जानवरों का आतंक छा रखा है जान जोखिम में डालकर हम गांव में रह रहे हैं |

यदि हमारे गांव में सड़क होती तो शायद गांव को छोड़कर सभी लोग नही जाते, आज भी सड़क तक पहुचने के लिए तीन किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़कर जाना पड़ता है |

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सालकोट ग्राम सभा में 5 गांव आते हैं पहला सालकोट जिसमे 7 परिवार 25 जनसंख्या ,गडोली मल्ली 3 परिवार 6 लोग, वीरों मल्ला 6 परिवार 15 लोग, वीरों तल्ला 4 परिवार 13 लोग और गडोली तल्ली 3 परिवार 3 लोग वो भी बुजुर्ग महिला |

याने की पूरी ग्राम सभा में 23 परिवार है और कुल जनसंख्या 62 है |

सबसे बड़े पते की बात है कि खुद ग्राम प्रधान भी अकेले ही निवास करते हैं उनके बच्चे भी देहरादून रहते हैं |

लेकिन बुजुर्गों का कहना है कि ग्राम प्रधान ही इमरजेंसी में दवाई आदि देखभाल उनकी करते हैं |