क्या सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत लोक सूचना अधिकारी से सूचना प्राप्त करना गुनाह व अपराध है ?
रिखणीखाल : स्थानीय ग्रामीण,सामाजिक व आर टी आई कार्यकर्ता मंगत सिंह रमोला ने सूचना के अधिकार अधिनियम के माध्यम से समस्त ग्राम पंचायत प्रधानों से लोक सूचना अधिकारी,विकास खंड रिखणीखाल से 01 अप्रैल 2020से 31 मार्च 2021 तक उनके द्वारा किये गये विकास कार्यो का विस्तृत विवरण व अन्य ज़रूरी सूचना केन्द्र व राज्य वित आदि की सूचना मांगी है।जो कि एक संवैधानिक अधिकार भी है।जिसे रिखणीखाल प्रखंड के प्रधानों व ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों द्वारा शिकायती पत्र के रूप में लिया व देखा जा रहा है।
मैंने तो सिर्फ सूचना एकत्र करने व जानकारी के लिए मांगा है।इसे अन्यथा न लिया जाये ताकि आम नागरिक को भी पता चले कि हमारे प्रिय योग्य,जुझारू,कर्मठ,सुशील प्रधान कितना अच्छा कार्य कर रहे हैं और गाँव का विकास कितना हो रहा है।
यह भी संज्ञान में आया है कि कुछेक प्रधानों व ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में गलतफहमी व भ्रम फैलाया जा रहा है कि श्री रमोला ने आर टी आई श्री अनूप भंडारी जो कि रिखणीखाल प्रखंड में सहायक विकास अधिकारी पंचायत है उनके कहने व बोलने से लगायी है जबकि श्री रमोला कहते हैं कि ये मेरा अधिकार है |
मैने किसी के कहने पर नहीं लगायी।क्या मेरा सूचना मागना गलत है या मेरे अधिकारों का हनन किया जा रहा है।फिर यदि सही काम किया है तो घबराने व बौखलाहट किस बात का है।श्री भंडारी पर झूठे आरोप लगाना बेबुनियाद व सरासर गलत है।मैने स्वयं अपने विवेक व बुद्धिमता से लगाया है।किसी अन्य को आरोप मढ़ना गलत है।ऐसा मालूम पड़ता है कि दाल में कुछ काला है वाली कहावत चरितार्थ होती है,तथा इस गफलत में न रहे कि आर टी आई वापस होगी।