1 जुलाई को मनाया जायेगा स्वरोजगार दिवस

उत्तराखंड में 1 जुलाई को मनाया जायेगा स्वरोजगार दिवस राज्य बनने से पहले और राज्य बनने के बाद भी जिस तरह से पहाड़ के युवाओं का पलायन सरकारी स्पस्ट रोजगार नीति के अभाव में आज भी जारी है वही पौड़ी गढ़वाल के धुमाकोट तहसील के नैनीडांडा विकासखंड में डुंगरी गाँव में एक उद्योग सुंदरियाल प्रोडक्सन राज्य का पहाड़ी मॉडल उद्योग चल रहा है

राज्य निर्माण से तकरीबन 2 साल पहले वर्ष 1998 में राज्य आंदोलनकारी बिजय सुंदरियाल ने अपने ही गाँव (घर) पर इस उद्योग की स्थापना की बिजय सुंदरियाल राज्य निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ साथ पहाड़ के युवाओं को रोजगार के लिए महानगरों में भटकना किसी अभिशाप से कम नहीं मानते थे पर उन्होंने ठाना कि स्थाई संसाधनों से रोजगार पैदा किया जाय और सरकारी नोकरी छोड़ कर ऋषिकेश में अपने छोटे व्यापार को छोड़ कर गाँव आ गये |

और अपने पुष्तैनी मकान पर ही जूश अचार जो कि आसानी से सुलभ हो बनाने में लग गये सुरूवाती दौर बहुत बुरा था समान बनाना और फिर उसे बेचना किसी चुनोती से कम नहीं था पर स्वर्गीय सुंदरियाल ने हार नहीं मानी और अपने कार्य को परिवार संग बहुत ही माध्यम गति से करते रहे धीरे धीरे उनके बनाये उत्पाद मार्केट में चलने लगे पहले सिर्फ जूश बुराँश से सुरु कर आज लगभग 40 से भी अधिक उत्पाद बना रहे है

आज जूश अचार मुरब्बा सोश पहाड़ी सिल पिसी लूण(नामक)के साथ साथ पहाड़ी दाले झगरा मंडुवा मसाले भी बना कर मार्केटिंग कर रहे है सुंदरियाल प्रोडक्सन की खाश बात यह है कि वह विशुद्ध पहाड़ी ऑर्गेनिक उत्पाद ही बनाती हैं और मार्केटिंग करती हैं 1 जुलाई को पिछले वर्ष कोरोना काल मे वो भी इस दुनिया से अलविदा कह गये पर उनका लगाया संकल्प बट ब्रछ आज भी फलीभूत हो रहा है तकरीबन 1000 से अधिक परिवार इस उद्योग से लाभान्वित हो रहे हैं

और प्रत्यक्ष रूप से भी 15 से 25 लोग इस उद्योग में काम करते हैं 1जुलाई को पहाड़ में स्वरोजगार पुरोधा की पहली पुण्यतिथि है और इस पुण्यतिथि को उत्तराखंड में स्वरोजगार दिवस के रूप में मनाने का निर्माण तमाम जनपछिय लोगो ने लिया है